हेमलता चौधरी एक ऐसा नाम है जो देश के लाखों करोड़ों लड़कियों के लिए प्रेरणा हैै।
हेमलता चौधरी एक ऐसा नाम है जो देश के लाखों करोड़ों लड़कियों के लिए प्रेरणा हैै। भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बाड़मेर जिले के गांव सरणू चिमनजी की छोटी सी ढाणी की रहने वाली हेमलता ने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर राजस्थान पुलिस में सब इंस्पेक्टर बनने की सफलता को हासिल किया है। इंस्पेक्टर बनने के बाद हेमलता जब पहली बार अपने गांव के किसान माता-पिता से मिलने पहुंची तो घर में मौजूद सभी लोगों के आंखों में खुशी के आंसू थे। हेमलता जब सिर्फ दसवीं में थी तब उनकी शादी हो गई थी और बारहवीं तक पहुंचते-पहुंचते वह मां बन गई।
हेमलता जब पहली बार अपने घर आई तो सिर्फ परिवार वाले ही नहीं बल्कि गांव के सभी लोग ने शुभकामनाएं दी। जिन भाइयों ने अपनी बहन का बाल विवाह कर दिया उन्ही भाइयों ने अपनी बहन को कंधे पर उठाकर पूरे गांव में घुमाया है। किसान पिता दुर्गाराम ने अपनी बेटी हेमलता को साफा पहनाया और मां ने गले मिलकर बेटी के प्रति प्यार जताया।
सफलता हासिल करने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि 12वीं पास करने के बाद आंगनबाड़ी में अस्थाई नौकरी व स्वयंपाठी के रूप में अपनी पढ़ाई जारी रखीं। इस दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी में 10 साल तक अपनी सेवाएं दी। एक समय ऐसा भी था जिसमें हेमलता पढ़ाई के लिए रोज घर से स्कूल तक आने जाने में 14 किलोमीटर का सफर करना पड़ता था। लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।
बेटी की कामयाबी के बाद पिता दुर्गा राम ने कहा कि हेमलता ने शादी के बाद स्वयंपाठी के रूप में कॉलेज में अपनी पढ़ाई पूरी की। सभी लोग उन्हें टीचर बनने की सलाह दे रहे थे। लेकिन उनका बचपन से सपना राजस्थान पुलिस में जाने का था। हेमलता ने पहली बार वर्ष 2015 में पुलिस कांस्टेबल की परीक्षा दी। रिटन टेस्ट में पास हुई, लेकिन फिजिकल में उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखीं।
हेमलता ने 2016 में फिर से राजस्थान पुलिस में अपनी किस्मत आजमाई इस बार उन्हें सफलता मिल गई। साल 2021 में हेमलता सब इंस्पेक्टर बन गई थी। जिसके बाद पासिंग आउट परेड के बाद में पहली बार खाकी वर्दी में घर आई तो सभी लोगों के आंखों में खुशी के आंसू थे।