एशियन पैरा गेम्स में भारत की पैरा शूटर मोना अग्रवाल ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया है। 10 मीटर एयर राइफल में स्वर्ण पदक जीतने के कुछ दिनों बाद, मोना ने 50 मीटर 3-पोजीशन (3P) फाइनल में भी स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। खास बात यह है कि उन्होंने यह मुकाबला किराए की राइफल के साथ खेला।
किराए की राइफल और स्कूटी पर सफर का संघर्ष
जयपुर की रहने वाली मोना अग्रवाल के लिए यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। जब उन्होंने तीन साल पहले 50 मीटर 3P में हाथ आजमाने का फैसला किया, तो उनके घर से सबसे नजदीकी शूटिंग रेंज 30 किलोमीटर दूर थी। वह स्कूटी से रेंज तक जाती थीं और किराए की 50 मीटर राइफल अपने साथ ले जाती थीं। वह हफ्ते में तीन दिन इस इवेंट का अभ्यास करती थीं, साथ ही घर के पास वाली रेंज में 10 मीटर एयर राइफल की प्रैक्टिस भी जारी रखती थीं।
महज चार महीने पहले ही उन्हें अपनी 50 मीटर राइफल मिली थी, लेकिन उसमें भी कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी। इसके चलते उन्हें एशियन पैरा गेम्स में भी किराए की राइफल के साथ ही उतरना पड़ा और उन्होंने शानदार रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीत लिया।
दो बच्चों की मां ने ऐसे साधा संतुलन
39 साल की मोना अग्रवाल दो बच्चों की मां हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस अनुशासन में केवल चार बार ही मुकाबला किया है, जिसमें पेरिस पैरालंपिक में 13वां स्थान हासिल करना भी शामिल है। दोनों स्पर्धाओं के लिए अभ्यास करना उनके लिए एक बड़ा संतुलन साधने जैसा था। नीलिंग, प्रोन और स्टैंडिंग पोजीशन में अभ्यास करने से उनके ऊपरी शरीर पर काफी दबाव पड़ता था।
अपनी पोश्चर स्टेबिलिटी को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने एक पर्सनल स्ट्रेंथ ट्रेनर की मदद ली, जिससे उनके स्कोर में काफी सुधार हुआ। नेशनल कोच जीवन राय ने भी उनकी मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि क्वालिफिकेशन के दौरान हवा भरी स्थिति होने के बावजूद मोना ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और अपनी मेहनत का पूरा फल हासिल किया।
