भारतीय बैडमिंटन जगत में इन दिनों एक अलग ही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। देश के बेहतरीन जूनियर शटलर स्मैश लगाने की कला सीखने से पहले कोर्ट पर शटल को रिट्रीव करना यानी डिफेंस मजबूत करना सीख रहे हैं। जगशेर सिंह खंगुरडा और देव रूपारेलिया जैसे युवा खिलाड़ी अपने खेल की शुरुआत मजबूत डिफेंस के साथ कर रहे हैं।
क्यों अपनाई जा रही है डिफेंसिव रणनीति
शुरुआती सालों में शरीर में ताकत यानी पावर की कमी के कारण खिलाड़ी सीधे अटैकिंग गेम खेलने के बजाय डिफेंसिव तरीका अपनाते हैं। यह जापानी खिलाड़ी केेंटो मोमोता के खेल से काफी प्रभावित है, जिन्होंने साल 2018 और 2019 में अपने डिफेंस से पूरी दुनिया में दबदबा बनाया था। खिलाड़ियों का मानना है कि लंबे शॉट्स और रैलियों से विपक्षी खिलाड़ी को परेशान किया जा सकता है, जब तक कि वह खुद गलती न कर बैठे।
युवा खिलाड़ियों का सफर
मुंबई के नालासोपारा-विरार के रहने वाले देव रूपारेलिया यूथ ओलंपिक्स के लिए तैयार हैं। वह पहले कैरम खेलते थे, लेकिन एक स्थानीय टूर्नामेंट में हारने के बाद उनके पिता ने उन्हें बैडमिंटन थमाने का फैसला किया। इसके बाद क्लब वन में उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई। लॉकडाउन के बाद 2021 में उनकी मुलाकात जगशेर से हुई और दोनों का डिफेंसिव खेल का अंदाज एक जैसा रहा।
यूरोप में मिली सफलता
देव रूपारेलिया ने यूरोप के एक महीने लंबे टूर्नामेंट सर्किट में शानदार प्रदर्शन करते हुए चार हफ्तों में दो खिताब जीते और एक बार क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे। उनके कोच ने उन्हें पुश, लिफ्ट और हाफ स्मैश के लिए तैयार किया था। खिलाड़ियों का कहना है कि डिफेंस का मतलब सिर्फ इधर-उधर दौड़ना नहीं है, बल्कि सही समय आने पर आक्रमण में बदलना है, जिसके लिए वे कड़ी ट्रेनिंग कर रहे हैं।
