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Asian Games में मेडल से चूकीं आशा इलांगो, लेकिन मिला नया आत्मविश्वास

ट्रिपल जंपर आशा इलांगो एशियन गेम्स में मेडल से चूक गईं, लेकिन इस सफर ने उन्हें नया आत्मविश्वास और परिवार का साथ दिलाया है।

Asian Games में मेडल से चूकीं आशा इलांगो, लेकिन मिला नया आत्मविश्वास

ट्रिपल जंपर आशा इलांगो एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने से बहुत कम अंतर से चूक गईं। उनका मुकाबला चीनी एथलीट ली यी के साथ बराबरी पर रहा, लेकिन बेहतर दूसरे प्रयास के कारण चीनी खिलाड़ी पोडियम तक पहुंच गईं। हालांकि आशा मेडल नहीं जीत पाईं, लेकिन उन्हें उससे भी ज्यादा कीमती चीज हासिल हुई, और वह है उनका खोया हुआ आत्मविश्वास और परिवार का भरोसा।

कोचिंग छोड़ने का बना लिया था मन

नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दौरान दिए गए इंटरव्यू में आशा ने बताया कि एक समय ऐसा था जब उन्होंने खेल छोड़ने का फैसला कर लिया था। टखने की चोट और बारह दशमलव आठ मीटर के आस-पास अटक जाने के कारण वह काफी निराश थीं। वह एनआईएस पटियाला से कोचिंग डिप्लोमा करना चाहती थीं। परिवार की तरफ से भी शादी का दबाव था क्योंकि वह सत्ताइस वर्ष की हो चुकी थीं।

कोच नलविन राजा से मिली नई शुरुआत

मुश्किल समय में एक दोस्त ने उन्हें एक साल और ट्रेनिंग करने की सलाह दी। इसके बाद आशा की मुलाकात कोच नलविन राजा से हुई। नलविन के मार्गदर्शन में उन्होंने रनिंग की बुनियादी तकनीकों से लेकर रिदम बनाने तक हर चीज पर मेहनत की। सात महीने की लगातार ट्रेनिंग के बाद उन्होंने चेन्नई और पुणे में अपने पर्सनल बेस्ट में सुधार किया। भुवनेश्वर में हुई इंटर-स्टेट नेशनल चैंपियनशिप में तेरह दशमलव आठ-नौ मीटर की छलांग लगाकर उन्होंने एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई किया और अपना पहला बड़ा नेशनल मेडल जीता।

एशियन गेम्स का अनुभव और भविष्य की तैयारी

एशियन गेम्स के अनुभव को याद करते हुए आशा ने बताया कि चोट के बाद उन्होंने कभी विदेश जाने या ऐसे माहौल में खेलने की उम्मीद नहीं की थी। अब कोई उनसे संन्यास या शादी की बात नहीं करता, बल्कि सब उन्हें आगे बढ़ने के लिए कह रही हैं। आशा अब अपने शानदार सीजन का अंत कर रही हैं और अगले साल नेशनल रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में जुटी हैं।

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