मां सरयू के घाटों पर दीपों की रोशनी और रामनाम की गूंज के बीच रामयंत्र की धुन पर्यटकों का ध्यान खींच रही है। गले में रामयंत्र टांगे और हाथों से ताल बजाते विक्रेता घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। रामभक्ति के इन गीतों और रामयंत्र की धुन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है, जिसे सुनकर देशी और विदेशी दोनों ही श्रद्धालु ठहर जाते हैं। मात्र 50 रुपये में एक जोड़ा रामयंत्र बेचने वाले ये विक्रेता अपनी आस्था को आजीविका का जरिया बना रहे हैं।
गोरखपुर और बिहार के विक्रेताओं की बढ़ी आय
गोरखपुर के सचींद्रनाथ सरयू घाट पर रामयंत्र बेचकर अपना घर चला रहे हैं। आम दिनों में उनकी रोजाना की कमाई 800 से 1000 रुपये होती थी, लेकिन दीपोत्सव के दौरान यह बढ़कर 1800 से 2500 रुपये तक पहुंच गई है। उनका कहना है कि रामयंत्र बेचना उनके लिए केवल कारोबार नहीं, बल्कि रामभक्ति से जुड़ने का एक माध्यम भी है। इसी तरह बिहार के राजेंद्र महतुर पिछले तीन साल से रामयंत्र बेच रहे हैं। राम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या में पर्यटकों के बढ़ने से उनकी रोज की कमाई अब 2000 रुपये तक हो गई है।
धार्मिक पर्यटन से मिल रहा नया रोजगार
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और विकास कार्यों ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया है, जिससे छोटे कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं। दीपोत्सव जैसे आयोजनों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जिसका सीधा फायदा घाटों पर सामान बेचने वाले छोटे दुकानदारों को मिल रहा है। रामयंत्र की यह धुन न सिर्फ धार्मिक माहौल बनाती है, बल्कि परंपरा और रोजगार को भी मजबूती से जोड़ रही है।
