वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे के मौके पर बॉलीवुड अभिनेत्री तापसी पन्नू ने मानसिक स्वास्थ्य और ट्रोलिंग के मुद्दे पर खुलकर अपने विचार रखे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि पहले वह भी यही मानती थीं कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता की जरूरत तभी पड़ती है जब कोई गंभीर रूप से परेशान हो या डिप्रेशन में हो। लेकिन समय के साथ उन्हें समझ आया कि इसके मायने और भी गहरे हैं।
कोविड के दौरान हुआ अपनी मेंटल हेल्थ का अहसास
तापसी ने बताया कि कोविड महामारी से पहले वह अपनी घबराहट और एंग्जायटी से बचने के लिए लगातार काम में व्यस्त रहती थीं या फिर खेलकूद में लगी रहती थीं ताकि अकेले न रहना पड़े। लेकिन लॉकडाउन के दौरान उन्हें मजबूरन खुद के साथ वक्त बिताना पड़ा और तब उन्हें अहसास हुआ कि उन्हें अपनी मेंटल हेल्थ का खास ख्याल रखने की कितनी जरूरत है।
शोबिज और ट्रोलिंग की कड़वी सच्चाई
अभिनेत्री ने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा होने के नाते ट्रोलिंग और पर्सनल हमलों का सामना करना बिल्कुल भी आसान नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि वह अपनी सेल्फ वर्थ जैसी फैंसी लाइनों से ट्रोलिंग को रोमांटिक नहीं बनाना चाहतीं। जब आपका करियर दूसरों के नजरिए पर निर्भर करता है, तो यह स्थिति काफी मुश्किल हो जाती है। शुरुआत में उनके लिए करियर और सोशल मीडिया दोनों मोर्चों पर यह बहुत कठोर था।
सोशल मीडिया से दूरी क्यों बनाई?
तापसी ने खुलासा किया कि लोगों के कुछ सेकंड के ध्यान और टिप्पणियों से कलाकारों को गहरा मानसिक नुकसान पहुंचता है। उन्होंने शुरुआत में सभी को खुश करने की कोशिश की, जिससे वह बर्नआउट का शिकार हो गईं। सोशल मीडिया ने एक्टर्स को अधिक संवेदनशील और तुलनात्मक बना दिया है, जहां लोग अभिनेताओं की काबिलियत पर सवाल उठाते हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपनी मानसिक शांति बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया से दूरी बना ली।
थेरेपी की ली मदद
तापसी ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी एंग्जायटी से निपटने के लिए थेरेपी की मदद ली है और उन्हें खुशी है कि अब समाज में इसे लेकर कोई टैबू नहीं बचा है। कोविड के दौरान जब वह काम से दूर नहीं भाग सकती थीं, तब उन्होंने अपने डर का सामना किया और थेरेपी के जरिए खुद को संभालना सीखा।
