बॉलीवुड में फिल्म Ramayana: Part One की रिलीज नजदीक आ रही है, और इसके साथ ही फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर्स और एग्जीबिटर्स के बीच रेवेन्यू-शेयरिंग यानी कमाई के बंटवारे को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डिस्ट्रीब्यूटर कोई एकतरफा मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि टेबल पर कई प्रस्ताव रखे गए हैं।
क्या हैं नए प्रस्ताव?
एक प्रस्ताव के तहत पहले ग्यारह दिनों के लिए पचपन प्रतिशत हिस्सा मांगा जा रहा है, जिसके बाद फिल्म पुराने रेवेन्यू-शेयरिंग स्ट्रक्चर पर लौट आएगी। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि रामायण दिवाली से ठीक पहले रिलीज हो रही है, जो कि थिएटर्स के लिए थोड़ा सुस्त दौर माना जाता है। वहीं दूसरे प्रस्ताव में पहले हफ्ते साठ प्रतिशत और दूसरे हफ्ते पचास प्रतिशत शेयर की बात कही गई है। इसके अलावा लाइफटाइम ग्रॉस बेंचमार्क के आधार पर फ्लैट रेवेन्यू-शेयरिंग सिस्टम लाने पर भी चर्चा हो रही है।
क्यों पुराना हो गया है 2009 का सिस्टम?
मौजूदा रेवेन्यू-शेयरिंग सिस्टम साल 2009 में लागू हुआ था। उस समय मल्टीप्लेक्स नए थे और उनके भारी-भरकम निवेश को सपोर्ट करने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर्स ने कम हिस्सा लेना स्वीकार किया था। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। मल्टीप्लेक्स का विस्तार धीमा हो चुका है और आजकल फिल्में शुरुआती हफ्तों के बाद भी लंबे समय तक बॉक्स ऑफिस पर टिकती हैं, जिसे 'द कश्मीर फाइल्स', 'छावा' और 'हनुमान अंश' जैसी फिल्मों ने साबित किया है।
साउथ फिल्मों और बॉलीवुड में दोहरा रवैया
डिस्ट्रीब्यूटर्स का यह भी तर्क है कि नेशनल मल्टीप्लेक्स चेन साउथ की बड़ी फिल्मों को पहले हफ्ते में पचपन से साठ प्रतिशत तक शेयर देती हैं और उन्हें चार हफ्ते की ओटीटी विंडो भी देती हैं, जबकि हिंदी फिल्मों के लिए आठ हफ्ते की विंडो का नियम है। ऐसे में Ramayana के मेकर्स बेहतर शर्तों की मांग कर रहे हैं, जो मौजूदा मार्केट के हिसाब से पूरी तरह सही है।
