एनीमेशन और विजुअल इफेक्ट्स (VFX) की दुनिया में तीन दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले नेशनल अवॉर्ड विजेता सी. अरुण कुमार ने हाल ही में फिल्मों के विजुअल्स को लेकर हो रही आलोचना पर खुलकर बात की है। उनका मानना है कि 'Ramayana', 'Jailer 2' और 'Dada' जैसी बड़ी फिल्मों के विजुअल मटीरियल पर उठ रहे सवाल असल में CGI (कंप्यूटर-जनरेटेड इमेजरी) और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के बीच बढ़ते भ्रम को दर्शाते हैं।
CGI और AI में अंतर नहीं समझ पा रहे दर्शक
पेरेंट एकेडमी में कम्युनिकेशंस, फिल्म और गेमिंग के डीन अरुण कुमार ने बताया कि जब उन्होंने 1980 के दशक में इस इंडस्ट्री में शुरुआत की थी, तब विजुअल मटीरियल तक लोगों की पहुंच बहुत सीमित थी। आज हर नागरिक के पास कंटेंट की भरमार है और हर कोई फ्रेम-दर-फ्रेम समीक्षा करके खुद एक क्रिटिक बन गया है।
उन्होंने कहा कि लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि CGI, VFX कंपोजिटिंग और जनरेटिव AI एक जैसी चीजें नहीं हैं। किसी विजुअल में कोई कमी दिखना या उसका अवास्तविक लगना हमेशा AI का इस्तेमाल होने का सबूत नहीं होता है।
मार्केटिंग और ट्रांसपेरेंसी पर भी की बात
अरुण कुमार ने यह भी बताया कि कई बार फिल्मों के ट्रेलर और प्रमोशनल मटीरियल में ऐसे एलिमेंट्स को बेहतर दिखाने के लिए AI का इस्तेमाल कर लिया जाता है जो शायद फाइनल फिल्म का हिस्सा भी न हों। उन्होंने सलाह दी कि फिल्ममेकर्स को अपनी क्रिएशन प्रोसेस को लेकर अधिक पारदर्शी होना चाहिए, जिससे दर्शकों का भरोसा और समझ दोनों बढ़ सकें।
