दादासाहब फाल्ke अवॉर्ड मिलने पर बोले अनंत नाग, पीएम मोदी ने फिल्म पुरस्कारों से भाई-भ भतीजावाद खत्म किया
दिग्गज कन्नड़ अभिनेता अनंत नाग को 2024 के दादासाहब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। उन्होंने इसके लिए पीएम मोदी की तारीफ की है।
कन्नड़ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को साल 2024 के प्रतिष्ठित दादासाहब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। यह भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान है। इस सम्मान के मिलने के बाद अनंत नाग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की है और कहा है कि पीएम मोदी ने भारत में फिल्म पुरस्कारों की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है और इसमें से भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) को खत्म किया है।
पीएम मोदी को दिया श्रेय
बुधवार को अपना नाम इस सम्मान के लिए घोषित होने के बाद एक इंटरव्यू में अभिनेता ने कहा कि पहले पुरस्कार देने की प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद और पक्षपात जैसी चीजें हुआ करती थीं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे बदल दिया। उन्होंने जनता से सीधे उन नामों की सिफारिश करने के लिए कहा जो उनके मन में थे। यह पहली बार था जब इस प्रक्रिया को पूरी तरह से जनता के सामने लाया गया।
कर्नाटक के लोगों को समर्पित किया पुरस्कार
79 वर्षीय अभिनेता ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें दादासाहब फाल्के पुरस्कार मिलेगा और वह अभी भी इस सम्मान को सहजता से स्वीकार करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि को कर्नाटक की जनता को समर्पित किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया जिन्होंने सोशल मीडिया पर इस पुरस्कार की घोषणा की थी।
सफर और थिएटर का अनुभव
अनंत नाग ने अभिनय के क्षेत्र में 50 साल पूरे कर लिए हैं। उन्होंने अपने करियर में 250 से अधिक फिल्मों में काम किया है। उन्होंने मुख्य रूप से कन्नड़ फिल्मों में काम किया है, इसके अलावा कई हिंदी फिल्मों में भी अपनी शानदार अदाकारी का जलवा बिखेरा है। उन्होंने 1970 के दशक में सत्यदेव दुबे, गिरीश कर्नाड और अमोल पालेकर जैसे थिएटर दिग्गजों के साथ काम किया था।
उन्होंने 1973 की कन्नड़ फिल्म 'संकल्प' से अपने सिनेमाई सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह 'अंकुर', 'निशांत', 'मंथन', 'भूमिका', 'कलयुग' और 'गहराई' जैसी समानांतर सिनेमा की फिल्मों का अहम हिस्सा रहे। इसके अलावा वह दूरदर्शन के लोकप्रिय धारावाहिक 'मालगुडी डेज' में भी नजर आए थे, जिसे उनके भाई शंकर नाग ने निर्देशित किया था।




