बॉलीवुड अभिनेता अगस्त्य नंदा ने अपनी फिल्म Ikkis के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन और सिनेमा को लेकर अपने विचारों खुलकर बात की है। श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी इस बायोग्राफिकल वॉर ड्रामा फिल्म में अगस्त्य ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर बड़ा कमर्शियल बिजनेस करने में असफल रही हो, लेकिन इसके कलाकारों और मेकर्स के लिए इसका संदेश बेहद खास है।

शांति का संदेश हमेशा रहेगा खास
फिल्म Ikkis परमवीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की जिंदगी पर आधारित थी, जो 1971 के बसंतर युद्ध के दौरान शहीद हो गए थे। फिल्म के बॉक्स ऑफिस परिणाम पर बात करते हुए अगस्त्य नंदा ने कहा कि उन्हें इस बात का कोई मलाल नहीं है। उन्होंने कहा कि फिल्म ने शांति और प्यार का जो संदेश दिया है, वह हमेशा प्रासंगिक रहेगा और शांति कभी भी आउट ऑफ फैशन नहीं हो सकती।

सिनेमा और बिजनेस की सच्चाई
कम उम्र में परिपक्वता दिखाते हुए द आर्चीज फेम अभिनेता ने फिल्म इंडस्ट्री के आर्थिक पहलुओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि फिल्मों के साथ एक व्यावहारिकता जुड़ी होती है क्योंकि इसमें बहुत सारा पैसा लगा होता है। अगस्त्य ने माना कि अगर कोई स्टार पैसा कमाकर देता है, तो उसे बड़ी फिल्में मिलती हैं, और अगर ऐसा नहीं होता है, तो नहीं मिलतीं। यह कोई व्यक्तिगत बात नहीं है, बल्कि पूरी तरह से कॉमर्स है।
कला और उद्योग का तालमेल
अगस्त्य ने आगे कहा कि लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि यह एक रचनात्मक क्षेत्र होने के साथ-साथ एक इंडस्ट्री भी है। यह किसी भी अन्य उद्योग के नियमों का पालन करती है जहां लोगों को मुनाफा कमाना होता है। फिल्म में उनके साथ दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र और जयदीप अहलावत भी नजर आए थे। अगस्त्य का मानना है कि सिनेमा में कलात्मक दृढ़ता लंबे समय तक याद रखी जाती है और वे बिना जल्दबाजी के अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं।
