Prince Yadav: दिल्ली के टेनिस बॉल क्रिकेटर कैसे बने टीम इंडिया के डेथ ओवर्स मैन
दिल्ली की धूल भरी ग्राउंड्स से निकलकर प्रिंस यादव ने कैसे तय किया सफर और बने टीम इंडिया के भरोसेमंद डेथ ओवर गेंदबाज।
by SNEHA SHARMA
दिल्ली के बाहरी इलाकों की धूल भरी जमीनों पर टेनिस बॉल से रात के समय क्रिकेट खेलना प्रिंस यादव के लिए किसी दूसरे जीवन जैसा लगता है। लेकिन नजफगढ़ के इस तेज गेंदबाज को वे दिन बहुत याद आते हैं और वह अपनी गेंदबाजी की मुख्य ताकत का श्रेय उन्हीं दिनों को देते हैं। उन्होंने बताया कि टेनिस बॉल क्रिकेट ने उनकी आर्म स्पीड को बेहतर बनाने में मदद की।
टेनिस बॉल से यॉर्कर की कला
टेनिस या टेप-बॉल क्रिकेट में गेंदबाज को पूरी तरह से अपनी गति और यॉर्कर पर निर्भर रहना पड़ता है। प्रिंस ने गीली टेनिस बॉल से भी अभ्यास किया, जो शाम के समय भारी हो जाती थी। इससे उन्हें वास्तविक मैच की स्थिति से निपटने में मदद मिली। उनका मुख्य उद्देश्य जितनी तेजी से हो सके यॉर्कर फेंकना होता था।
डेथ ओवर्स में शानदार प्रदर्शन
अपनी उच्च गति और सटीक यॉर्कर के दम पर प्रिंस ने बहुत कम समय में खुद को डेथ ओवर्स का माहिर खिलाड़ी साबित किया है। 16 से 20 ओवरों के बीच गेंदबाजी करते हुए उन्होंने बेहद किफायती गेंदबाजी की है और बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। उनकी यॉर्कर की विविधता और 140 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार बल्लेबाजों को चौंका देती है।
गेंदबाजी कोच मॉर्ने मोकेल का भरोसा
टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच मॉर्ने मोकेल ने भी प्रिंस की मानसिकता और दबाव की स्थिति में शांत रहने की कला की सराहना की है। मुश्किल परिस्थितियों में गेंदबाजी करने की उनकी क्षमता उन्हें टीम का एक खास गेंदबाज बनाती है। विराट कोहली जैसे दिग्गज का विकेट चटकाने से लेकर यॉर्कर फेंकने की उनकी कला ने उन्हें क्रिकेट जगत में एक अलग पहचान दिलाई है।
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