क्रिकेटर कुमार कुशाग्र के पिता ने रोमिला थापर से सीखकर ऐसे बनाया बेटे को क्रिकेटर
जानिए कैसे झारखंड के कुमार कुशाग्र के पिता ने बिना क्रिकेट खेले, इतिहासकार रोमिला थापर की रिसर्च तकनीक से बेटे को टीम इंडिया तक पहुंचाया।
by NEHA RAJPUT
टीम इंडिया में अपनी जगह बनाने वाले युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र की सफलता के पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी है। उनके पिता शशिकांत, जो जमशेदपुर में जीएसटी के संयुक्त कमिश्नर हैं, ने खुद कभी क्रिकेट नहीं खेला था और न ही कभी बल्ला छुआ था। इसके बावजूद उन्होंने अपने बेटे को भारत की कैप पहनाने का सपना देखा और उसे पूरा करके दिखाया।
रोमिला थापर की रिसर्च से मिली प्रेरणा
शशिकांत ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। वहां वे इतिहासकार रोमिला थापर के संपर्क में आए, जो पढ़ाई और शोध (Research) पर बहुत जोर देती थीं। शशिकांत ने इसी शोध की तकनीक को क्रिकेट में लागू किया। उन्होंने बॉब वूलमर और डॉन ब्रैडमैन की किताबें पढ़ीं, कोचिंग मैनुअल का अध्ययन किया और हर एक शॉट की बारीकी पर गहन रिसर्च की।
बिना अकादमी के घर पर दी ट्रेनिंग
शशिकांत ने अपने बेटे कुमार कुशाग्र को किसी क्रिकेट अकादमी में भेजने के बजाय खुद ही कोच की भूमिका निभाई। उनका मानना था कि अकादमी जाने से समय बर्बाद होता है। उन्होंने वीडियो ट्यूटोरियल और राहुल द्रविड़ व वीरेंद्र सहवाग की बैटिंग हाइलाइट्स की मदद से बेटे को तैयार किया। नेट्स पर खुद गेंदबाजी करके अभ्यास कराया।
डर भगाने के लिए रणजी खिलाड़ियों के साथ कराई विकेटकीपिंग
कुमार कुशाग्र का शुरुआती दौर में क्रिकेट में कोई खास मन नहीं था, लेकिन पिता की जिद ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। बल्लेबाजी के साथ-साथ उनके अंदर से डर भगाने के लिए 12 साल की उम्र में ही रणजी खिलाड़ियों के सामने विकेटकीपिंग कराना शुरू कर दिया।
आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में सफर
झारखंड की ओर से खेलते हुए कुमार कुशाग्र ने कम उम्र में ही अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाई। उन्हें 19 साल की उम्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का हिस्सा बनाया गया और 2024 में इंडिया ए का बुलावा मिला। आईपीएल नीलामी में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 7.2 करोड़ रुपये में खरीदा था, और पिछले सीजन वे गुजरात टाइटन्स का हिस्सा रहे। अब उनका चयन न्यूजीलैंड दौरे के लिए वनडे टीम में हो गया है।
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