वाल्मीकि जयंती: योगी सरकार ने सांस्कृतिक विरासत और सफाई-मित्रों के सम्मान को दी नई दिशा

महर्षि वाल्मीकि जयंती पर यूपी सरकार ने सांस्कृतिक विकास के साथ सफाई-मित्रों के लिए न्यूनतम मानदेय और स्वास्थ्य सुरक्षा का ऐलान किया है।

by NEHA RAJPUT

वाल्मीकि जयंती: योगी सरकार ने सांस्कृतिक विरासत और सफाई-मित्रों के सम्मान को दी नई दिशा

अपने राज्य का सांस्कृतिक गौरव और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के प्रति संवेदना को जोड़ते हुए महर्षि वाल्मीकि जयंती पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बड़ा संदेश दिया है। एक ओर जहां रामायण के रचयिता आदिकवि महर्षि वाल्मीकि से जुड़े पवित्र स्थलों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वंचित समाज को उनके श्रम का सच्चा सम्मान और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

सांस्कृतिक पुनर्जागरण और रामायण सर्किट का विकास

भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण तब तक अधूरा है, जब तक उन तपोस्थलों को सम्मान न मिले जिन्होंने देश की आत्मा को गढ़ा है। योगी सरकार रामायण सर्किट और राम वन-गमन पथ के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि से जुड़े स्थलों का कायाकल्प कर रही है। चित्रकूट के लालापुर स्थित वाल्मीकि आश्रम इस पहल का प्रमुख केंद्र है, जहां महर्षि की 12.5 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है। इसके अलावा अयोध्या, इटावा, कानपुर के बिठूर और अन्य क्षेत्रों में भी विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं।

सफाई-मित्रों के लिए ऐतिहासिक घोषणाएं

प्रतीकों के साथ-साथ समाज के जीवन में सुधार लाना भी जरूरी है। वाराणसी में स्वच्छता सेनानियों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें नींव का पत्थर बताया। आउटसोर्सिंग व्यवस्था की कमियों को दूर करते हुए यूपी आउटसोर्स सेवा निगम के माध्यम से 16 हजार रुपये न्यूनतम मानदेय की गारंटी दी गई है।

स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा का कवच

कर्मचारियों को न्यूनतम मानदेय के साथ-साथ ईएसआई के तहत अस्पताल की सुविधा, सुरक्षा बीमा और पीएफ की कटौती जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। इससे संक्रमण के जोखिम और बीमारियों से जूझने वाले इन कर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी और वे भविष्य के लिए आर्थिक रूप से सुरक्षित हो सकेंगे।

Related Articles

These articles might be interesting for you as well: