भारत में कॉटन की बड़ी किल्लत, सर्दियों से पहले महंगे हो सकते हैं कपड़े और कंबल
भारत में कॉटन का उत्पादन घटने और मांग बढ़ने से सर्दियों में कपड़े, कंबल और रजाई महंगे होने की आशंका बढ़ गई है।
by SNEHA SHARMA
सर्दियों का मौसम नजदीक आते ही बाजार में गर्म कपड़ों की खरीदारी शुरू हो गई है। लेकिन इस बार कपड़ा कारोबारियों और ग्राहकों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। देश में कॉटन यानी कपास की सप्लाई कम होने की आशंका है, जबकि विदेशों से कपड़ों के ऑर्डर लगातार बढ़ रहे हैं।
क्यों हो रही है कॉटन की कमी
मौसम की मार के कारण इस बार कपास की पैदावार पर बुरा असर पड़ सकता है। अल नीनो की स्थिति, कम बारिश और तापमान बढ़ने की वजह से 2026-27 के सीजन में देश का कपास उत्पादन करीब 3.4 प्रतिशत घटकर नए निचले स्तर पर जा सकता है। किसानों द्वारा एक ही बार फसल की चुनाई करने से भी बाजार में कॉटन की मात्रा कम हुई है।
सप्लाई पर बढ़ रहा है भारी दबाव
सिर्फ उत्पादन घटने ही नहीं, बल्कि निर्यात बढ़ने से भी सप्लाई पर दबाव है। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ संभावित व्यापार समझौतों के कारण भारतीय गारments के निर्यात को बढ़ावा मिल रहा है। उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, मांग 3.6 करोड़ गांठ से ज्यादा हो सकती है, जबकि उत्पादन 2.8 करोड़ गांठ से भी कम रहने की आशंका है।
एक महीने में कितनी बढ़ी कीमतें
कपास की कीमतों में अचानक तेजी देखने को मिली है। गुजरात की बेंचमार्क 29 मिलीमीटर कॉटन की कीमत एक महीने के भीतर करीब 7 प्रतिशत बढ़कर 68,500 रुपए प्रति कैंडी पहुंच गई है। कच्चे माल की लागत बढ़ने से कपड़ा मिलों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
क्या महंगे हो जाएंगे कंबल और रजाई
उत्पादन लागत बढ़ने का असर कपड़ा बनाने वाली कंपनियों पर पड़ सकता है। हालांकि, रजाई, कंबल और गद्दों की कीमतें पूरी तरह से स्टॉक, अन्य कच्चे माल और बाजार की मांग पर भी निर्भर करेंगी।
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