खुद की एयरलाइन खोलने में कितना आता है खर्च और कितना होता है मुनाफा?

भारत में नई एयरलाइन शंख एयर की शुरुआत के बीच जानिए खुद की हवाई कंपनी खोलने का शुरुआती बजट और रोजाना के मुनाफे का पूरा गणित।

by NIDHI JANGIR

खुद की एयरलाइन खोलने में कितना आता है खर्च और कितना होता है मुनाफा?

भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद नई घरेलू विमानन कंपनी शंख एयर आसमान में उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ और नोएडा से अपनी शुरुआत करने जा रही इस एयरलाइन को लेकर हर युवा और निवेशक के मन में यह सवाल है कि खुद की हवाई कंपनी शुरू करने में कितना खर्च आता है।

एयरलाइन शुरू करने का शुरुआती बजट और निवेश

भारत में पैसेंजर एयरलाइन शुरू करने के लिए सरकार ने कड़े आर्थिक नियम बनाए हैं। डीजीसीए के नियमों के मुताबिक यदि कोई कंपनी भारी विमानों के साथ उड़ान शुरू करना चाहती है, तो उसके पास कम से कम पचास करोड़ रुपये का शुरुआती फंड होना चाहिए। हालांकि, एयरलाइन को सफलतापूर्वक लॉन्च करने के लिए पांच सौ से पंद्रह करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम निवेश की जरूरत होती है।

विमान खरीदने या लीज पर लेने का खर्च

एक कमर्शियल विमान की कीमत आठ सौ से ग्यारह सौ करोड़ रुपये से अधिक होती है। इतनी बड़ी रकम देना संभव नहीं होने के कारण ज्यादातर एयरलाइंस विमानों को लीज पर लेती हैं। एक विमान का मासिक किराया तीन से चार करोड़ रुपये होता है। नियमों के अनुसार पहले साल के भीतर कम से कम पांच विमानों का बेड़ा तैयार करना अनिवार्य होता है।

डेली ऑपरेशनल कॉस्ट और कमाई का गणित

विमान उड़ाने की कुल लागत का तीस से चालीस फीसदी हिस्सा केवल ईंधन पर खर्च होता है। इसके अलावा पायलट, क्रू और रखरखाव का खर्च भी जुड़ता है। विमानन क्षेत्र में नेट प्रॉफिट मार्जिन बहुत कम यानी तीन से चार फीसदी होता है। नई एयरलाइंस को शुरुआती दो से तीन साल केवल अपनी लागत निकालने और घाटे को कम करने में लग जाते हैं।

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