फ्रांस में छात्र आंदोलन: पेरिस की सड़कों से संसद तक का इतिहास

फ्रांस के इतिहास में छात्र आंदोलनों की बड़ी भूमिका रही है। 1968 से लेकर अब तक के प्रमुख प्रदर्शनों की पूरी कहानी।

by SNEHA SHARMA

फ्रांस में छात्र आंदोलन: पेरिस की सड़कों से संसद तक का इतिहास

फ्रांस के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में छात्रों की भूमिका हमेशा से निर्णायक रही है। मई 1968 की प्रसिद्ध क्रांतियों के बाद से, जब भी फ्रांसीसी सरकार ने शिक्षा, रोजगार या सामाजिक सुरक्षा के ढांचे को बदलने का प्रयास किया है, विश्वविद्यालयों और हाई स्कूलों के छात्रों ने सड़कों पर उतरकर सत्ता को झुकाने का काम किया है। 1986 के देवेके कानून से लेकर 2023 के पेंशन सुधारों तक छात्र आंदोलन केवल शिक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने पूरे देश के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को दिशा दी है।

वर्तमान में फ्रांस में हो रहे प्रदर्शन इसी ऐतिहासिक श्रृंखला की अगली कड़ी हैं, जहां आज की युवा पीढ़ी अपने भविष्य, क्रय शक्ति और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए एक बार फिर सड़कों पर है।

1968 के बाद के 5 बड़े छात्र आंदोलन

1986: देवेके बिल विरोध

विश्वविद्यालय प्रवेश नियमों को कड़ा करने और उच्च शिक्षा में असमानता बढ़ाने वाले देवेके विधेयक के खिलाफ पूरे देश में लाखों छात्रों ने प्रदर्शन किया। पुलिस के साथ हुई झड़प के दौरान एक छात्र की दुखद मौत हो गई, जिससे पूरे फ्रांस में जनआक्रोश फैल गया। चौतरफा दबाव के चलते सरकार को यह शिक्षा विधेयक वापस लेना पड़ा और तत्कालीन शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।

1994: युवा रोजगार अनुबंध विरोध

सरकार ने युवाओं की बेरोजगारी घटाने के नाम पर एक कानून पेश किया जिसके तहत नियोक्ताओं को युवा स्नातकों को न्यूनतम वेतन से कम भुगतान करने की छूट दी गई थी। छात्रों ने इसे शोषण करार देकर उग्र प्रदर्शन किए, जिसके बाद सरकार को इस कानून को निरस्त करना पड़ा।

2006: प्रथम रोजगार अनुबंध विरोध

इस कानून के तहत कंपनियों को 26 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को नौकरी के शुरुआती दो वर्षों में बिना कारण बताए कभी भी बर्खास्त करने का अधिकार मिलता था। छात्रों और मजदूर संघों के भारी विरोध और रेल सेवाओं के ठप होने के बाद राष्ट्रपति ने इस कानून को रद्द कर दिया।

2016: श्रम कानून सुधार विरोध

नए लेबर लॉ के जरिए काम के घंटों और ओवरटाइम के नियमों में ढील दी गई, जिसे छात्रों ने श्रम अधिकारों पर हमला माना। इस आंदोलन से रात भर जागने वाला एक सांस्कृतिक आंदोलन शुरू हुआ जहां छात्रों ने पेरिस के रिपब्लिक चौक पर डेरा डाला।

2023: पेंशन सुधार विरोध

सरकार द्वारा सेवानिवृत्ति की कानूनी उम्र 62 से बढ़ाकर 64 वर्ष कर दिए जाने के बाद युवाओं को लगा कि उनके लिए नौकरी के अवसर देर से पैदा होंगे। छात्रों ने ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर पढ़ाई का बहिष्कार किया और विरोध दर्ज कराया।

आज क्यों उबल रहा है फ्रांस?

फ्रांसीसी छात्र आंदोलनों में हमेशा से एक समान सूत्र दिखाई देता है कि युवा पीढ़ी अपने सामाजिक अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ती आई है। आज के प्रदर्शन भी इसी ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा हैं, जहां छात्र शिक्षा बजट में कटौती, बढ़ती महंगाई और जनतांत्रिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करने का विरोध कर रहे हैं। फ्रांस का इतिहास साबित करता है कि जब भी युवाओं को अपना भविष्य अनिश्चित दिखता है, वे सड़कों को ही अपनी संसद बना लेते हैं।

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