स्पैनिश ऑस्कर एंट्री 'द ब्लैक बॉल' एलजीबीटीक्यू समुदाय को समर्पित, टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में मिली सराहना

स्पेन की ऑस्कर प्रविष्टि फिल्म 'द ब्लैक बॉल' LGBTQ अधिकारों पर आधारित है। इसे टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में स्टैंडिंग ओवेशन मिला।

by Viral24

स्पैनिश ऑस्कर एंट्री 'द ब्लैक बॉल' एलजीबीटीक्यू समुदाय को समर्पित, टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में मिली सराहना

स्पेन की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि के रूप में चुनी गई फिल्म 'द ब्लैक बॉल' (La Bola Negra) इन दिनों फिल्म फेस्टिवल्स में काफी चर्चा में बनी हुई है। स्पैनिश गृहयुद्ध और कामुकता की पृष्ठभूमि पर बनी इस दमदार ड्रामा फिल्म को एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) अधिकारों का समर्थन करने और इस समुदाय को श्रद्धांजलि देने के रूप में देखा जा रहा है।

टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में मिला शानदार रिस्पॉन्स

इस फिल्म ने हाल ही में टोरंटो फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में खूब सुर्खियां बटोरीं, जहां इसे दर्शकों द्वारा स्टैंडिंग ओवेशन दिया गया। फेस्टिवल में इस फिल्म की जमकर तारीफ हुई और संयोग से ठीक उसी समय स्पेन ने इसे अपने इंटरनेशनल फीचर फिल्म एकेडमी अवॉर्ड्स के कंटेंडर के रूप में घोषित किया।

जाने-माने निर्देशकों की जोड़ी ने किया है निर्देशन

फिल्म का निर्देशन जेवियर अंब्रोसी और जेवियर काल्वो ने किया है, जिन्हें क्रिएटिव जोड़ी 'लॉस जाविस' के नाम से भी जाना जाता है। कान फिल्म फेस्टिवल में शानदार शुरुआत के बाद से ही इस जोड़ी के काम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हो रही है, जहां उन्होंने सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार जीता था।

फिल्म की कहानी और कलाकारों का खास योगदान

इस फिल्म में पेनेलोप क्रूज और ग्लेन क्लोज़ जैसे दिग्गज कलाकारों के कैमियो भी देखने को मिलते हैं। इसके अलावा मुख्य भूमिका में मिगुएल बर्नार्डू नजर आते हैं। यह फिल्म स्पेन के अलग-अलग दौर के तीन समलैंगिक पुरुषों की कहानियों को आपस में पिरोती है। निर्देशक अंब्रोसी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह अतीत के उस LGBTQ समुदाय को श्रद्धांजलि है जिसने मानवाधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी थी।

फेडरिको गार्सिया लोर्का के काम से मिली प्रेरणा

फिल्मकारों के मुताबिक, इसकी शुरुआती प्रेरणा स्पेनिश गृहयुद्ध की शुरुआत में फासीवादी ताकतों द्वारा मारे गए प्रसिद्ध कवि फेडरिको गार्सिया लोर्का के एक अप्रकाशित नाटक से मिली थी। उनके चार पन्नों के अधूरे काम ने निर्देशकों को इतना आकर्षित किया कि उन्होंने वर्षों तक उनके लेखन और जीवन से जुड़े दस्तावेजों पर अध्ययन किया और इस कहानी को पर्दे पर उतारा।

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