राजस्थान का एक ऐसा प्राचीन गांव भी है जहां दुल्हन नहीं, दूल्हा होता है विदा

आज तक हमने राजस्थान की अजीबोगरीब घटनाएं सुनी है, लेकिन आज हम आपको राजस्थान के एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं,

by MUSTKIM CHOPDAR

राजस्थान का एक ऐसा प्राचीन गांव भी है जहां दुल्हन नहीं, दूल्हा होता है विदा

जहां दुल्हन नहीं दूल्हा होता है विदा, इस गांव की कहानी जरा हटके हैं और यह गांव प्रसिद्ध शहर माउंट आबू के पास बसा हुआ है, इस अनोखे गांव का नाम जवाई गांव है और इस गांव की सबसे अजीब बात यह है कि इस गांव में दुल्हन नहीं बल्कि दूल्हा अपने घर से विदाई लेकर आता है और उसे हमेशा हमेशा के लिए अपने ससुराल का जमाई राजा बन कर रहना पड़ता है, क्या आपने अभी तक ऐसे गांव के बारे में सुना हैं, अगर सुना है तो आप हमें जरूर बताएं।

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प्रसिद्ध शहर माउंट आबू में बसा हुआ यह गांव बहुत ही विचित्र गांव है और यह गांव लगभग आज से 700 साल पुराना बताया जा रहा है, इस गांव का नाम जवाई ऐसे ही नहीं पड़ा है बल्कि इसके पीछे भी एक राज छिपा हुआ है और वह राज यह है कि उस गांव की एक लड़की से शादी करने के बाद उसका पति यहीं आकर बस गया था जिसकी वजह से इस गांव का नाम जवाई गांव पड़ गया।

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इस गांव के पूर्वजों का कहना है कि इस गांव में लड़कियों की तादाद बढ़ने के कारण उनकी शादियों में समस्या हो रही थी, दो भाई जीवाजी और कान्हाजी ने इस अजीबोगरीब गांव की दो लड़कियों से विवाह किया, एक भाई जीवाजी ने रंबा नाम की लड़की से विवाह किया और जवाई नामक गांव बसाया, वहीं दूसरी ओर दूसरे भाई कान्हाजी ने पवना नामक लड़की से शादी करके उसी गांव से लगभग 10 किलोमीटर दूर कनारी नामक ढाणी को बसाया।

जवाई नामक गांव एक छोटा ही गांव है जिसमें लगभग 40 परिवार बसे हुए हैं, जो कि परमार राजपूतों में ही है, इनमें से बहुत से लोग अपना जीवन यापन करने के लिए खेती-बाड़ी करते हैं और कई लोग घोड़ा गाड़ी चलाकर अपना जीवन निर्वाह करते हैं। हालांकि हम कह सकते हैं कि माउंट आबू में कुल 16 गांव उपस्थित है और हमारे पूर्वजों के अनुसार उनका कहना है कि माउंट आबू में विशिष्ट आश्रम गोमुख से सोलंकी, परिहार, चौहानों और परमार जैसे कई आश्रम उपस्थित हुए थे, माउंट आबू के 16 गांव मैं से कुछ विशिष्ट गांवो के नाम - साल गांव, गोवा गांव, उतरज गांव, आरना गांव, शेर गांव, मांच गांव और हेटमजी गांव जैसे कई गांव शामिल है।

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लोगों का कहना है कि इस गांव के लगभग थोड़ी ही दूर एक आजा माताजी का मंदिर है, जिसको लगभग 1300 साल पुराना माना जाता है, उस गांव के लोग इस आजा माता जी के मंदिर को काफी मानते हैं और इसकी दिन रात पूजा अर्चना करते रहते हैं, लोगों का कहना है कि जब इस मंदिर में शाम के वक्त में घंटियां बजती है, तो इसके साथ 99 अलग-अलग प्रकार के झालरों की आवाज गूंजती है, जो सबके मन को काफी अच्छी लगती है, लोग इस मंदिर को पूजने के लिए काफी दूर दूर से आते है।

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