Prahaar Review: राजकुमार राव की फिल्म 'प्रहार' कोर्टरूम ड्रामा है, जो कभी-कभी भटक जाती है
राजकुमार राव की फिल्म प्रहार रिलीज हो गई है। जानिए कैसी है 26/11 के मुंबई हमलों और उज्जवल निकम की कहानी पर आधारित यह कोर्टरूम ड्रामा फिल्म।
by NIDHI JANGIR
बॉलीवुड में 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों की यादों पर कई फिल्में बनी हैं। इसी कड़ी में अब निर्देशक अविनाश अरुण की नई फिल्म Prahaar रिलीज हो गई है। यह फिल्म मुंबई हमलों के दौरान अजमल कसाब के खिलाफ केस लड़ने वाले सरकारी वकील उज्जवल निकम की जिंदगी और कानूनी लड़ाई पर आधारित है। फिल्म को 3 स्टार रेटिंग मिली है।
फिल्म की कहानी और कास्ट
कहानी की शुरुआत उज्जवल निकम की बतौर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्ति से होती है। वह कसाब के खिलाफ केस तैयार करते हैं, जिसका सामना अब्बास काजमी करते हैं, जो कसाब का केस लड़ने वाले इकलौते वकील थे। फिल्म में राजकुमार राव के अलावा वामिका गब्बी, सिकंदर खेर और जयदीप अहलावत जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में हैं। जयदीप अहलावत और सिकंदर खेर के काम की भी सराहना की जा रही है।
क्यों कमजोर पड़ जाती है फिल्म?
फिल्म का पहला हाफ काफी कसा हुआ है और तनाव को बेहतरीन तरीके से दिखाता है। लेकिन दूसरे हाफ में फिल्म अपनी मुख्य ट्रैक से भटक जाती है। उज्जवल निकम की पर्सनल लाइफ और परिवार के सबप्लॉट्स को जरूरत से ज्यादा समय दिया गया है, जिससे यह कोर्टरूम ड्रामा थोड़ा थकाने लगता है। कसाब की मानसिक स्थिति पर दिखाया गया ट्रैक भी कहानी में ज्यादा कुछ नहीं जोड़ता।
राजकुमार राव का बेहतरीन अभिनय
कमियों के बावजूद फिल्म का सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट राजकुमार राव का अभिनय है। स्क्रीन पर उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि वह एक्टिंग नहीं कर रहे बल्कि वह खुद वही किरदार हैं। वामिका गब्बी और सिकंदर खेर ने भी अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है। अगर आप एक दमदार कोर्टरूम ड्रामा देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है।
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