Nana Patekar Last Rites: आधी रात को क्यों हुआ नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार, बेटे मल्हार पाटेकर ने बताई वजह
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का पुणे में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने रात में अंतिम संस्कार होने की वजह बताई।
by NEHA RAJPUT
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार देर रात पुणे के उनके फार्महाउस पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। अभिनेता को उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने रात करीब साढ़े ग्यारह बजे मुखाग्नि दी। इस दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और हजारों की संख्या में फैंस मौजूद रहे।
नाना पाटेकर की विरासत को आगे बढ़ाएंगे
अंतिम संस्कार के बाद मीडिया से बात करते हुए बेटे मल्हार पाटेकर ने अपने पिता के निधन पर बात की। उन्होंने कहा कि उनके पिता का काम उन्हें अमर बनाता है। उनका दृष्टिकोण, विशेष रूप से नाम फाउंडेशन के माध्यम से शुरू की गई सामाजिक पहल, उनके निधन के बाद भी जारी रहेगी।
मल्हार ने कहा कि नाना साहेब जैसे लोग कभी पूरी तरह से हमें छोड़कर नहीं जाते। वे अपने काम के माध्यम से अमर हो जाते हैं। मानवता के नाम पर दुनिया की भलाई के लिए काम करने की उनकी सोच हमेशा से एक जैसी रही है। संगठन के जरिए जल क्षेत्र में काम चल रहा था और कश्मीर में शिक्षा व स्वास्थ्य के बड़े पैमाने पर बड़े प्रोजेक्ट शुरू हो चुके थे।
आधी रात को क्यों हुआ अंतिम संस्कार?
गुरुवार सुबह गोवा में दिल का दौरा पड़ने से नाना पाटेकर का निधन हो गया था। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को गोवा से उनके फार्महाउस लाया गया, जहां देर रात अंतिम संस्कार हुआ। पत्रकारों ने जब मल्हार से पूछा कि परिवार ने इतनी रात को अंतिम संस्कार करने का फैसला क्यों किया, तो उन्होंने इसकी वजह बताई।
मल्हार पाटेकर ने बताया कि वे गोवा में थे और पार्थिव शरीर को गांव के फार्महाउस पर लाया जाना था। उन्हें उम्मीद थी कि पार्थिव शरीर जल्दी पहुंच जाएगा, लेकिन इसमें कुछ समय लग गया। चूंकि यह दुखद घटना सुबह-सुबह हुई थी और काफी समय बीत चुका था, इसलिए परिवार ने तय किया कि अंतिम संस्कार आज ही कर दिया जाए।
निधन और राजकीय सम्मान
गुरुवार सुबह गोवा स्थित अपने आवास पर सीवियर कार्डियक अरेस्ट आने के बाद नाना पाटेकर का निधन हो गया था। तबियत बिगड़ने पर उन्होंने सुबह के वक्त अपने एक दोस्त को फोन किया था। इसके बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर साल्कर ने उनके निधन की पुष्टि की थी। बाद में उन्हें पुणे में राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई।
Related Articles
These articles might be interesting for you as well: