Gulshan Devaiah: बॉलीवुड में हिंसा का दौर सिर्फ एक भ्रम है, अमिताभ और अमोल पालेकर की तरह सब साथ चल सकता है
एक्टर गुलशन देवैया ने कहा कि फिल्मों में हिंसा का बढ़ता चलन सिर्फ एक भ्रम है। हर तरह की फिल्में साथ चल सकती हैं।
by NIDHI JANGIR
बॉलीवुड एक्टर गुलशन देवैया ने हाल ही में एक इंटरव्यू में सिनेमा में हिंसा के बढ़ते चलन पर खुलकर बात की है। उनका मानना है कि आज बड़े पर्दे पर हिंसा और एक्शन फिल्मों का दबदबा दिखना महज एक भ्रम है, क्योंकि हर जॉनर की फिल्में हमेशा से एक-दूसरे के साथ अस्तित्व में रही हैं।
हिंसा का चलन सिर्फ एक भ्रम
गुलशन देवैया ने 1970 और 1980 के दशक का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय अमिताभ बच्चन के 'एंग्री यंग मैन' अंदाज वाली फिल्में और अमोल पालेकर की मध्यवर्गीय जीवन पर आधारित फिल्में एक साथ पसंद की जाती थीं और दोनों ही सफल थीं। भारत में सामाजिक और आर्थिक विविधता बहुत है, इसलिए अलग-अलग दर्शकों के लिए बनने वाली विभिन्न प्रकार की फिल्में आसानी से साथ चल सकती हैं।
फैमिली एंटरटेनर फिल्म 'Little Thomas'
विलेन के रूप में दमदार भूमिकाएं निभाने वाले गुलशन अब परिवार के साथ देखने लायक फिल्मों की ओर भी रुख कर रहे हैं। उनकी आने वाली फिल्म Little Thomas एक बच्चे की कहानी है जो छोटा भाई चाहता है। यह फिल्म 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है, जिसमें उनके साथ रसिका दुग्गल और हृदयंश पारेख भी नजर आएंगे।
फिल्मों के चुनाव पर क्या बोले गुलशन?
अपने करियर के चुनाव को लेकर गुलशन ने कहा कि उनका कोई मास्टर प्लान नहीं है। वह बतौर दर्शक खुद जिस तरह की फिल्में देखना पसंद करते हैं, वही जॉनर अपनी फिल्मोग्राफी में भी चाहते हैं। नकारात्मक भूमिकाएं करते-करते थकने के बाद उन्होंने अपनी पसंद में छोटे बदलाव किए हैं।
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